हरियाणा निकाय चुनाव में BJP की बड़ी जीत, कांग्रेस पर सवाल: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

हरियाणा निकाय चुनाव में BJP की बड़ी जीत, कांग्रेस पर सवाल: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

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BJP wins big in Haryana civic elections, questions Congress

चंडीगढ़। किसी भी चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं का सामान्य दावा होता है कि चुनाव के नतीजे सरकार के कामकाज का आकलन करने के साथ ही राजनीतिक दलों की दिशा तय करेंगे।

हरियाणा के सात शहरी निकायों के चुनाव में जिस तरह सत्तारूढ़ भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ, उसके आधार पर प्रदेश के मतदाताओं ने न केवल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कामकाज पर अपनी सहमति की मुहर लगाई है, बल्कि साल 2029 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भी अपनी दिशा तय कर दी है।

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इन शहरी निकाय चुनाव को पूरी गंभीरता और मनस्यता से लड़ा। हर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के साथ-साथ नायब सैनी छोटे से छोटे वार्ड में प्रचार करने गए।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस समेत उनके समस्त विरोधी दलों ने मुख्यमंत्री की इस क्रियाशीलता और चुनाव जीतने की लगन पर सवाल भी उठाए, लेकिन नायब सैनी न तो थके, न रुके और न ही उन्होंने किसी के बोलने की कोई परवाह की। उन्हें जिस भी वार्ड से यह रिपोर्ट मिली कि भाजपा उम्मीदवार का चुनाव फंसा हुआ है, तुरंत वहीं पहुंच गए और मामले का निपटारा कर ही वापस लौटे।

मुख्यमंत्री की निकाय चुनाव जीतने की इस लगन और मेहतन का ही नतीजा है कि उनकी पूरी टीम समर्पण भाव से चुनाव में लगी रही। उनके प्रभारी मंत्रियों और संगठन के नेताओं के साथ आम कार्यकर्ताओं ने निकाय चुनाव में खूब मेहनत की।

बंगाल चुनाव में जीत का खुमार उनके दिल और दिमाग पर पूरी तरह से चढ़ा हुआ था। नायब सैनी ने अक्टूबर 2024 में राज्य की सत्ता संभाली थी। तब से अब तक डेढ़ साल हो चुका है। इऩ डेढ़ सालों में नायब सैनी ने जनता के बीच जाकर पहला प्रत्यक्ष चुनाव लड़ा, जो कामयाबी हासिल की।

हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का भी नई सरकार में यह पहला चुनाव था, लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकार वोट चोरी करने के आरोप लगाने तक सिमटे रहे और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शहरी निकायों को जीतकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की थपकी भी हासिल कर चुके हैं।

उन्होंने पूरी जिम्मेदारी, रणनीतिक कौशल और सामंजस्य के साथ चुनाव लड़ते हुए अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिलाई। कुल मिलाकर शहरी निकाय चुनाव ने जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को राजनीतिक रूप से ताकत दी है, वहीं साल 2029 के चुनाव की पटकथा और दिशा दोनों तय कर दी हैं।

चुनावी रणनीति से दूर किए उम्मीदवारों की राह के कांटे

राज्य के शहरी निकाय चुनाव में सत्ता और संगठन के बीच जबरदस्त तालमेल नजर आया। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डा. सतीश पुनिया और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली ने संगठनात्मक मोर्चा संभाले रखा, जबकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चुनावी रणनीति को धरातल पर लागू करते हुए उम्मीदवारों की राह के कांटे दूर किए।

मंत्रियों के साथ संगठन के पदाधिकारियों की चुनाव ड्यूटी लगाई गई। नायब सैनी प्रदेश के लोगों को यह समझाने में पूरी तरह से कामयाब रहे कि विपक्ष में रहने वाली कांग्रेस उनके क्षेत्रों में विकास नहीं कर सकेगी, जबकि असली विकास की गंगोत्री केंद्र की मोदी और हरियाणा की नायब सरकार के यहां से होकर बहने वाली है। यही वजह है कि शहरी निकायों में लोगों ने इस अवधारणा को समझा और विकास की गतिशीलता बनाए रखने के लिए भाजपा के प्रति अपना स्नेह उजागर कर दिया।

बंगाल समेत पांच राज्यों में भाजपा की जीत का असर

हरियाणा में हुए शहरी निकाय चुनाव से पहले हाल ही में बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव हुए हैं, जिनमें भाजपा की जीत हुई है। राज्य के शहरी निकायों में इस जीत का असर लोगों की सकारात्मकता के रूप में इस तरह से देखने को मिला कि आने वाला समय भाजपा का है, जबकि कांग्रेस वोट चोरी के आरोप लगाने तक ही सीमित रहने वाली है।

पंचकूला में कांग्रेस की हार और भाजपा की जीत इसका बड़ा उदाहरण है। पंचकूला के चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कान्फ्रेंस कर वोट चोरी के आरोप लगा दिए थे, जिसके जवाब में भाजपा ने दलील दी कि अपनी हार पर बाद में सियापा करने वाली कांग्रेस ने यह प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है।